प्रयागराज : प्रो. चट्टोपाध्याय ने भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व उजागर किया

प्रयागराज: प्रयागराज के इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में “इतिहास संचेतना” व्याख्यानमाला के तहत प्रो. उमेश चंद्र चट्टोपाध्याय ने “ए पैंचुएटेड अकेडमिक जर्नी ऑफ़ ए कैपिटिव सेल्फ” विषय पर चर्चा की। नालंदा विश्वविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफेसर रहे प्रो. चट्टोपाध्याय ने भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन शिक्षा व्यवस्था के बीच गहरे अंतर को उजागर किया, और बताया कि कैसे भारतीय संस्कृति ने वैश्विक सांस्कृतिक अध्ययन को प्रभावित किया है।

उन्होंने शैक्षणिक यात्रा में मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए समकालीन शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को भी विस्तार से समझाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमाकांत ने किया, जबकि विभागाध्यक्ष प्रो. हर्ष कुमार ने प्रो. चट्टोपाध्याय का स्वागत करते हुए पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से उनका अभिनंदन किया। इस कार्यक्रम में विभाग के स्नातक, परास्नातक छात्र, शोधार्थी और अध्यापक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे विषय की प्रासंगिकता और गहराई स्पष्ट हुई।

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Author: AM News

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